जबलपुर में ‘स्वाद’ के नाम पर ‘सेहत’ का सौदा: प्रशासन का चाबुक चला, लापरवाह प्रतिष्ठानों पर 1 लाख का जुर्माना
संस्कारधानी जबलपुर के जिन होटलों और रेस्टोरेंट्स की चमक-दमक देखकर आप सपरिवार भोजन का आनंद लेने जाते हैं, वहां आपकी थाली में स्वाद के साथ-साथ ‘लापरवाही’ भी परोसी जा रही थी। शहर के प्रतिष्ठित इलाकों में चल रहे इस खतरनाक खेल का पर्दाफाश खाद्य सुरक्षा विभाग की हालिया कार्रवाई ने कर दिया है। मुनाफाखोरी की अंधी दौड़ में आम आदमी की जान की कीमत कितनी सस्ती हो गई है, यह शुक्रवार को सामने आए मामलों से साफ हो गया, जब प्रशासन ने शहर के कई नामचीन प्रतिष्ठानों पर कुल एक लाख रुपये का जुर्माना ठोका।
अपर कलेक्टर एवं न्याय निर्णयन अधिकारी नाथुराम गौड़ के न्यायालय से जारी आदेश ने उन व्यापारियों की नींद उड़ा दी है जो अब तक नियमों को ताक पर रखकर अपनी दुकानें सजाए बैठे थे। हैरानी की बात यह है कि यह कार्रवाई किसी दूर-दराज के इलाके में नहीं, बल्कि शहर के मुख्य क्षेत्रों में हुई है। कहीं एक्सपायरी डेट का सामान बेचा जा रहा था, तो कहीं बिना रजिस्ट्रेशन के ही धड़ल्ले से कारोबार चल रहा था।
जुर्माने की हकीकत: नाम बड़े और दर्शन छोटे
इस कार्रवाई में सबसे बड़ी गाज ‘हनीफ मियाँ एंड कंपनी’ पर गिरी है, जिन पर खाद्य सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ाने के लिए 20,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया है। वहीं, ‘कशरवानी समोसा सेंटर’ भी पीछे नहीं रहा, जहाँ प्रतिबंधित या अमानक स्तर की बोतलों (तीन मिली वाली) की बिक्री पर 10,000 रुपये का दंड दिया गया।
बात यहीं खत्म नहीं होती। शहर के किराना स्टोर्स भी जनता की सेहत से खिलवाड़ में बराबर के भागीदार निकले। ‘सुरेश किराना’ और ‘पाल्मो मार्केटिंग’ जैसी दुकानों पर एक्सपायरी डेट (कालातीत) सामग्री बेचने और अनुचित भंडारण के लिए क्रमशः 5,000 और 10,000 रुपये का जुर्माना लगाया गया। वहीं, ‘ताज किराना’ को गुणवत्ता मानकों की अनदेखी के चलते 10,000 रुपये चुकाने होंगे। हद तो तब हो गई जब ‘नेगा जी इंटरप्राइजेज’ बिना किसी पंजीयन के ही व्यवसाय करते पाए गए, जिस पर उन्हें भी 10,000 रुपये का हर्जाना भरना पड़ा।
जनता के लिए एक कड़वा सबक
प्रशासन की यह कार्रवाई उन व्यापारियों के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि लोगों की जान से खेलने की कीमत अब चुकानी होगी। हालांकि, यह जुर्माना उस धोखे के सामने बहुत छोटा है जो चमकदार रैपर और सजी हुई प्लेटों की आड़ में ग्राहकों के साथ किया जा रहा था। खाद्य सुरक्षा विभाग का दावा है कि यह निगरानी आगे भी जारी रहेगी, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या महज चालान कटने से इन मुनाफाखोरों की नीयत सुधरेगी?
फिलहाल, जबलपुर की जनता को अब न केवल अपनी जेब, बल्कि अपनी थाली पर भी पैनी नजर रखनी होगी, क्योंकि जिसे आप ‘लजीज’ समझ रहे हैं, हो सकता है वह प्रशासन की नजर में ‘जहरीला’ हो।
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