कोविड वैक्सीन से हार्ट अटैक का कोई संबंध नहीं| एक्सपर्ट पैनल ने कहा – यह तो दिल को बचाता है, पर क्या अब खत्म होंगी अफवाहें?

कोविड वैक्सीन और युवाओं में अचानक दिल के दौरे (हार्ट अटैक) से होने वाली मौतों को लेकर एक लंबे समय से चली आ रही आशंकाओं पर आज विराम लग गया है। कर्नाटक में बैठे बड़े डॉक्टरों और विशेषज्ञों के एक पैनल ने गहन अध्ययन के बाद यह साफ़-साफ़ कह दिया है कि कोविड वैक्सीन और हार्ट अटैक के बीच कोई जुड़ाव नहीं है। यह खबर उन अनगिनत परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आई है, जिनके अपनों को खोने के बाद या खुद वैक्सीन लगवाने के बाद मन में एक अनकहा डर बैठ गया था। रिपोर्ट तो यहां तक कहती है कि कोविड का टीका तो लंबे समय में दिल को बीमारियों से बचाने में मदद करता है।


अनगिनत चिंताओं पर विराम: क्या कहती है विशेषज्ञ पैनल की रिपोर्ट?

विशेषज्ञों ने अपनी विस्तृत रिपोर्ट में कई अहम बिंदुओं पर रोशनी डाली है, जो आम आदमी की उलझनें दूर कर सकते हैं। पैनल ने स्पष्ट किया है कि कम उम्र में होने वाली दिल की बीमारियों (जैसे समय से पहले हृदय रोग) और पहले हुए कोविड इन्फेक्शन या कोविड वैक्सीन लगवाने के पिछले इतिहास के बीच कोई सीधा संबंध नहीं मिला है। उन सभी दावों को खारिज कर दिया गया है, जिनमें दोनों के बीच किसी खतरनाक रिश्ते की बात कही जा रही थी।

‘लॉन्ग कोविड’ (यानी कोविड होने के बाद लंबे समय तक रहने वाली परेशानियां) को लेकर भी एक बड़ा भ्रम था कि क्या यह युवाओं में अचानक हार्ट अटैक की वजह बन रहा है। इस पर एक्सपर्ट्स ने साफ किया कि ऐसा कोई मजबूत सबूत नहीं मिला है। हां, कोविड संक्रमण के ठीक बाद शरीर में सूजन बढ़ सकती है, जिससे दिल पर थोड़ा बहुत असर पड़ सकता है, लेकिन यह लंबे समय तक चलने वाला असर नहीं है जो हार्ट अटैक का कारण बने। और सबसे बड़ी बात, इस रिसर्च में पाया गया है कि कोविड का टीका लगवाने से तो लंबे समय में दिल की बीमारियों से बचाव होता है। यानी, वैक्सीन दिल के लिए हानिकारक नहीं, बल्कि एक तरह का सुरक्षा कवच है! क्या यह खबर उन सभी सवालों का जवाब देती है, जो रातों की नींद उड़ा रहे थे और हर युवा को अपने दिल को लेकर डरा रहे थे?


विज्ञान की कसौटी पर खरी उतरी सच्चाई: कैसे किया गया यह अध्ययन?

इस महत्वपूर्ण निष्कर्ष तक पहुंचने के लिए विशेषज्ञों ने कोई हवाई बात नहीं की है, बल्कि इसे पूरी वैज्ञानिक कसौटी पर परखा गया है। कमेटी ने 1 अप्रैल से 31 मई, 2025 के बीच 45 साल से कम उम्र के 251 ऐसे मरीजों का गहराई से अध्ययन किया, जिन्हें दिल की समस्या हुई थी। इन सभी मरीजों के विस्तृत मेडिकल रिकॉर्ड और टीकाकरण इतिहास की जांच की गई और उनकी तुलना 2019 में किए गए एक ऐसे ही अध्ययन के नतीजों से की गई, जब कोविड का नाम भी किसी ने नहीं सुना था।

सिर्फ यहीं तक नहीं, इस पैनल ने दुनिया भर में हुए कई बड़े और भरोसेमंद रिसर्च पेपर्स की भी समीक्षा की। ज़्यादातर वैश्विक रिसर्च में भी यही नतीजा निकला कि कोविड टीकाकरण और अचानक हृदय संबंधी घटनाओं के बीच कोई कारण संबंध नहीं है। यह अध्ययन दर्शाता है कि कैसे विज्ञान, आंकड़ों और तथ्यों के आधार पर सबसे जटिल और डराने वाले सवालों का जवाब दे सकता है। क्या यह वैज्ञानिक पड़ताल हमें भविष्य के लिए एक नई दिशा नहीं दिखाती, जहां हम अफवाहों के बजाय सबूतों पर भरोसा करें?


डर पर विज्ञान की जीत और आगे का रास्ता

यह रिपोर्ट न केवल लाखों लोगों के मन में बसी आशंकाओं को दूर करती है, बल्कि यह सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में विज्ञान की एक बड़ी जीत भी है। एक ऐसे समय में जब गलत जानकारी और अफवाहें समाज में डर फैला रही थीं, यह स्पष्ट और वैज्ञानिक नतीजा एक उम्मीद की किरण है। यह बताता है कि टीके सुरक्षित हैं और इनका उद्देश्य हमें बीमारियों से बचाना है, न कि कोई नुकसान पहुंचाना।

क्या अब समय नहीं आ गया है कि हम भय और अफवाहों को छोड़कर विज्ञान की राह पर चलें और अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य के लिए सही निर्णय लें? यह रिपोर्ट हमें याद दिलाती है कि सबसे बड़ी ताकत तथ्यों में होती है, न कि सुनी-सुनाई बातों में।

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