जबलपुर में रहकर नेपाली से इंडियन बना दीपक थापा, वोटर ID के जरिए बनवाया पासपोर्ट

नेपाल से भारत आए एक युवक ने सुरक्षा एजेंसियों को चौंका दिया है। दिल्ली एयरपोर्ट पर काठमांडू की फ्लाइट पकड़ने पहुंचे दीपक थापा को जांच के दौरान रोका गया, और फिर जो खुलासे हुए, वो न सिर्फ हैरान करने वाले हैं बल्कि सुरक्षा और पहचान संबंधी सरकारी व्यवस्थाओं की पोल भी खोलते हैं।

नेपाली व्यक्ति जबलपुर आकर बना भारतीय

दीपक थापा, जो मूल रूप से नेपाल का निवासी है, कुछ वर्षों पहले भारत में प्रवेश करता है और सीधा जबलपुर शहर आकर बस जाता है। कोई शोर नहीं, कोई कानूनी प्रक्रिया नहीं, और न ही किसी सीमा पार दस्तावेज़ी अनुमति का प्रमाण। धीरे-धीरे वह पवित्र अपार्टमेंट, जबलपुर में रहना शुरू करता है और स्थानीय लोगों के बीच घुल-मिल जाता है। उसकी उपस्थिति इतनी सामान्य और साधारण नजर आती है कि किसी को भी यह संदेह नहीं होता कि यह व्यक्ति किसी दूसरे देश से आया हुआ है।

वोटर आईडी बनवाकर बना ‘भारतीय नागरिक’

Screenshot-2025-07-10-182853 जबलपुर में रहकर नेपाली से इंडियन बना दीपक थापा, वोटर ID के जरिए बनवाया पासपोर्ट

जबलपुर में रहते हुए दीपक थापा ने सबसे पहले अपना नाम कैंट विधानसभा क्रमांक 99 की मतदाता सूची में दर्ज कराया। मतदाता सूची में नाम जुड़ते ही उसने भारतीय नागरिक होने का एक वैधानिक प्रमाण पत्र पा लिया, जिसके जरिए अन्य दस्तावेज बनाना आसान हो गया। आधार कार्ड, पैन कार्ड और भारतीय पासपोर्ट, सब कुछ उसने व्यवस्थित तरीके से हासिल किया। ऐसा प्रतीत होता है कि या तो प्रक्रिया में गंभीर लापरवाही हुई या फिर किसी स्तर पर उसे अंदरूनी सहयोग प्राप्त था।

दिल्ली एयरपोर्ट पर हुआ पर्दाफाश

22 मई 2025 को जब दीपक थापा दिल्ली अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर पहुंचा, तो उसका अगला पड़ाव देश वापसी यानि काठमांडू था। लेकिन एयरपोर्ट पर सुरक्षा जांच के दौरान इमिग्रेशन विभाग के अधिकारियों को कुछ असामान्य लगा। दस्तावेज़ों के परीक्षण और सघन पूछताछ के बाद दीपक की असली पहचान सामने आ गई। उसने खुलकर स्वीकार किया कि वह नेपाल का नागरिक है और कई वर्षों से जबलपुर में रह रहा है। यही वह पल था जब उसकी ‘भारतीय पहचान’ का झूठ उजागर हुआ।

भारत निर्वाचन आयोग से आए शिकायत का लेटर

दीपक के द्वारा भारतीय पासपोर्ट और मतदाता पहचान पत्र का गलत तरीके से उपयोग करने की जानकारी मिलने के बाद एयरपोर्ट के एडिशनल कमिश्नर कार्यालय ने तत्परता से भारत निर्वाचन आयोग को एक औपचारिक पत्र लिखा। इस पत्र में बताया गया कि दीपक थापा की वोटर आईडी फर्जी है और उसकी नागरिकता भी संदिग्ध है। निर्वाचन आयोग ने यह पत्र राज्य के मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी को भेजा, जहां से इसे जबलपुर जिला निर्वाचन अधिकारी तक पहुंचाया गया।

SDM की जांच रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुई FIR

जबलपुर जिले के रांझी एसडीएम रघुवीर सिंह मरावी को जैसे ही यह प्रकरण सौंपा गया, उन्होंने तत्काल गहन जांच शुरू कराई। प्रारंभिक रिपोर्ट के बाद यह स्पष्ट हो गया कि दीपक थापा ने फर्जी तरीके से मतदाता सूची में नाम जुड़वाया और उसके बाद पासपोर्ट सहित अन्य भारतीय दस्तावेज बनवा लिए। इस रिपोर्ट के आधार पर जबलपुर के सिविल लाइन थाने में दीपक थापा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई। यह एफआईआर भारतीय दंड संहिता की गंभीर धाराओं के तहत दर्ज की गई है।

पुलिस को शक, अकेला नहीं है दीपक थापा

एएसपी सूर्यकांत शर्मा और एसडीएम मरावी ने यह संकेत दिए हैं कि दीपक थापा का यह कारनामा एक बड़े फर्जीवाड़े का हिस्सा हो सकता है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि क्या दीपक ने यह सब अकेले किया, या उसके पीछे कोई संगठित नेटवर्क है जो विदेशी नागरिकों को भारत में बसाने और फर्जी दस्तावेज़ दिलाने में मदद कर रहा है। दीपक कब से जबलपुर में रह रहा था, उसने किन-किन लोगों की मदद से यह सब किया । इन सभी बिंदुओं की जांच अब पुलिस की प्राथमिकता बन चुकी है।

प्रशासन सहित पहचान प्रणाली पर गंभीर सवाल

यह घटना न सिर्फ सुरक्षा एजेंसियों बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े करती है। कैसे एक विदेशी नागरिक बिना किसी वैध दस्तावेज़ के मतदाता सूची में नाम जुड़वा सकता है? पासपोर्ट जैसे संवेदनशील दस्तावेज़ की प्रक्रिया इतनी लचर कैसे हो सकती है? इस तरह की चूक न केवल राष्ट्र की आंतरिक सुरक्षा के लिए खतरा हैं, बल्कि देश की पहचान प्रणाली की विश्वसनीयता पर भी गहरा आघात करती हैं।

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