जबलपुर में ‘फर्जी ब्लड रिपोर्ट’ से गर्भवती महिला को डराया| तकीरजा सन पैथलैब पर ‘लूट’ के गंभीर आरोप, CMHO से जांच की मांग
जबलपुर, 5 जुलाई, 2025: जबलपुर शहर में निजी अस्पतालों और पैथोलॉजी लैबों द्वारा मरीजों को गलत रिपोर्ट देकर भयभीत करने और उनसे पैसे ऐंठने का एक और गंभीर मामला सामने आया है। घंटाघर क्षेत्र स्थित तकीरजा सन पैथलैब पर एक गर्भवती महिला को खून में प्लेटलेट्स की अत्यधिक कमी बताकर अस्पताल में भर्ती करने का आरोप लगा है। हालांकि, जब महिला के परिजनों ने उसी सैंपल की जांच दो अन्य प्रतिष्ठित लैबों से कराई, तो रिपोर्ट पूरी तरह सामान्य पाई गई, जिसके बाद परिजनों ने अस्पताल परिसर में जमकर हंगामा किया और प्रबंधन पर लूट व धोखाधड़ी के गंभीर आरोप लगाए हैं।
5% प्लेटलेट का ‘झूठा दावा’: दूसरी लैब में मिले 1,35,000
यह पूरा मामला अधारताल क्षेत्र के इरफान मंसूरी से जुड़ा है। प्रसव के लिए अपनी बहन को कटनी से जबलपुर लाए इरफान ने उसे तकीरजा अस्पताल में भर्ती कराया। अस्पताल से जुड़ी पैथोलॉजी लैब (तकीरजा सन पैथलैब) ने महिला की रक्त जांच रिपोर्ट में दावा किया कि उसके शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या मात्र 5 प्रतिशत है, जो किसी भी गर्भवती महिला के लिए अत्यंत खतरनाक स्थिति होती है और इसमें तत्काल इलाज की आवश्यकता होती है।
हालांकि, इरफान मंसूरी को इस रिपोर्ट पर संदेह हुआ। उन्होंने बिना देरी किए उसी ब्लड सैंपल की जांच शहर की दो अन्य निजी लैबों से दोबारा कराई। इन दोनों लैबों की रिपोर्ट में जो खुलासा हुआ, वह चौंकाने वाला था: महिला के शरीर में प्लेटलेट्स की संख्या 1,35,000 पाई गई — जो चिकित्सा मानकों के अनुसार बिल्कुल सामान्य मानी जाती है। रिपोर्ट का यह विरोधाभास देखकर परिजन भड़क उठे और उन्होंने तत्काल तकीरजा अस्पताल प्रशासन से स्पष्टीकरण मांगा।
लैब डॉक्टर की ‘हैरानी’: सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल
जब इस पूरे मामले पर तकीरजा सन पैथलैब के डॉक्टर सनील साहू से बात की गई, तो उन्होंने भी अपनी लैब की रिपोर्ट में हुई इस ‘गड़बड़ी’ पर हैरानी जताई। डॉक्टर साहू ने कहा कि उन्हें स्वयं नहीं पता कि यह चूक कैसे हुई। एक पैथोलॉजी लैब के प्रमुख द्वारा इस तरह की ‘अनभिज्ञता’ व्यक्त करना, लैब की आंतरिक कार्यशैली, उसके कर्मचारियों की दक्षता और उसकी जांच रिपोर्टों की विश्वसनीयता पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
CMHO से जांच की मांग: क्या थमेगा मरीजों के शोषण का सिलसिला?
परिजनों का स्पष्ट कहना है कि यह मामला सिर्फ एक गर्भवती महिला तक सीमित नहीं है। उनका आरोप है कि ऐसे न जाने कितने मरीजों को निजी पैथोलॉजी लैबों और अस्पतालों द्वारा गलत रिपोर्टें देकर गुमराह किया जाता होगा और अनावश्यक रूप से अस्पताल में भर्ती कर उनसे पैसे वसूले जाते होंगे। उन्होंने मुख्य जिला स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO) से इस पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच की मांग की है और दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने की अपील की है। यह घटना निजी स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में मरीजों के शोषण को रोकने के लिए सख्त निगरानी और जवाबदेही की आवश्यकता को रेखांकित करती है।
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