संजय पाठक के खनिज घोटाले पर विधानसभा में उठे सवाल

विधायक संजय पाठक की मां के नाम खोली गई निर्मला मीनिंग सहित सिहोरा की माइनिंग कंपनियों पर 443 करोड़ का जुर्माना!

जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील में खनिज दोहन के नाम पर बड़ा खेल सामने आया है। माइनिंग कंपनियों, आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन, निर्मला मिनरल्स और पैसिफिक एक्सपोर्ट पर मध्यप्रदेश सरकार ने 443 करोड़ रुपये से ज्यादा का भारी-भरकम जुर्माना लगाया है। इन कंपनियों पर आरोप है कि इन्होंने सरकार से मिली स्वीकृति से कहीं अधिक खनिज का उत्खनन किया और निर्धारित राशि सरकार को जमा नहीं की। यह खदाने पूर्व मंत्री और वर्तमान विजयराघवगढ़ विधायक संजय पाठक से जुड़ी हुई है हालांकि विधायक संजय पाठक इन खदानों में डायरेक्टर तो नहीं है लेकिन निर्मला माइनिंग्स उनकी मां के नाम पर है और कागजों में ना सही पर हर किसी को पता है कि यह सभी खदानें किसकी है।

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विधानसभा में उठा सवाल, सरकार ने खोला राज

यह मामला उस समय उजागर हुआ जब कांग्रेस विधायक कुँवर अभिजीत शाह ने विधानसभा में यह प्रश्न उठाया कि इन कंपनियों द्वारा किए गए अवैध उत्खनन और 1000 करोड़ रुपये की बकाया राशि को लेकर सरकार ने अब तक क्या कार्रवाई की है। उन्होंने यह भी पूछा कि इस संबंध में की गई शिकायत पर क्या कोई ठोस कदम उठाया गया है।

खनिज विभाग की जांच के बाद 443 करोड़ की वसूली की सिफारिश

सरकार की ओर से जवाब देते हुए खनिज मंत्री श्री चेतन्य काश्यप ने विधानसभा को बताया कि 31 जनवरी 2025 को ईओडब्ल्यू (आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ) में शिकायत दर्ज होने के बाद 23 अप्रैल 2025 को एक जांच समिति गठित की गई। इस समिति ने अपनी जांच रिपोर्ट 6 जून 2025 को सौंपते हुए बताया कि तीनों कंपनियों द्वारा 443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890 रुपये का अवैध उत्खनन किया गया है। इस पर जीएसटी की अलग से वसूली की सिफारिश की गई है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की हुई अनदेखी

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही 2017 के एक ऐतिहासिक फैसले (W.P. 114/2014 – Common Cause बनाम भारत सरकार) में यह स्पष्ट कर चुका है कि यदि कोई कंपनी खनिज विभाग से स्वीकृत मात्रा से अधिक उत्खनन करती है, तो उससे पूरी लागत के साथ जुर्माना वसूला जाए। इसके बावजूद सरकार को अब तक 1000 करोड़ से अधिक की वसूली नहीं हुई है।

अब होगी वसूली के कार्यवाई

सरकार ने विधानसभा में माना है कि कार्यवाही “प्रचलन में है”, यानी अभी तक वसूली पूरी नहीं हुई है। जानकारी के अनुसार वसूली के लिए यह फाइल जबलपुर कलेक्टर दीपक सक्सेना के पास पहुंचेगी और उसके बाद यह रकम वसूलने की जिम्मेदारी उनकी होगी। अब सरकार वास्तव में इतनी बड़ी राशि वसूल कब तक कर पाएगी और क्या इतने बड़े खनिज घोटाले में सिर्फ जुर्माना पर्याप्त होगा या फिर कानूनी कार्रवाई भी होगी यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

कांग्रेस सरकार में राज्य मंत्री रहे हैं संजय पाठक

संजय पाठक कभी कांग्रेस में थे और कांग्रेस सरकार में राज्य मंत्री का ओहदा भी उन्हें मिला था, फिर वह बीजेपी में आ गए और अब भी प्रभावशाली विधायक माने जाते हैं। अब इन खदानों में भले कागजों पर विधायक संजय पाठक का नाम ना हो पर हर किसी को पता है कि यह खदान किनकी हैं। जनवरी में मिली शिकायत पर जांच के बाद आखिरकार 7 महीना बाद वसूली का प्रतिवेदन आया है। अब देखना होगा कि यह वसूली कड़ाई और मुस्तैदी के साथ की जाती है या फिर मामला फिर से ठंडे बस्ते में चला जाता है।

खनिज संपदा सरकार की संपत्ति है जिससे मिले राजस्व का उपयोग प्रदेश की तरक्की के लिए होता है, और उसका अवैध दोहन पूरे प्रदेश की अर्थव्यवस्था को प्रभावित करता है। अब जब सवाल अरबों का है, तो कार्रवाई भी पारदर्शी और कठोर होनी चाहिए।

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