“पाकिस्तान कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती है”: संसद में अमित शाह का राहुल गांधी और चिदंबरम पर तीखा हमला

नई दिल्ली | 29 जुलाई 2025 | रिपोर्टर: HIMANSHU

संसद के मानसून सत्र के दौरान मंगलवार को लोकसभा में उस वक्त माहौल गरमा गया जब गृह मंत्री अमित शाह ने विपक्ष के नेता राहुल गांधी, कांग्रेस पार्टी और वरिष्ठ नेता पी. चिदंबरम पर निशाना साधते हुए एक के बाद एक कई गंभीर आरोप लगाए।

‘ऑपरेशन महादेव’ पर कांग्रेस द्वारा उठाए गए सवालों का जवाब देते हुए शाह ने न केवल राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर कांग्रेस की भूमिका पर सवाल उठाया बल्कि यह तक कह दिया कि—

“पाकिस्तान कांग्रेस की ऐतिहासिक गलती है, अगर विभाजन को स्वीकार न किया गया होता, तो पाकिस्तान होता ही नहीं।”

यह बयान संसद में काफी विवादास्पद साबित हुआ और सत्तापक्ष-विपक्ष के बीच तीखी नोकझोंक का कारण बना।


ऑपरेशन महादेव पर कांग्रेस के सवाल, शाह का जवाब तीखा

गृह मंत्री संसद में जम्मू-कश्मीर में हाल ही में हुए ऑपरेशन महादेव पर बोल रहे थे, जिसमें तीन पाकिस्तानी आतंकियों को सुरक्षा बलों द्वारा ढेर कर दिया गया। विपक्षी दल, विशेष रूप से कांग्रेस, इस ऑपरेशन को लेकर पारदर्शिता और सबूत की मांग कर रही थी।

शाह ने कहा कि –

हमें दुख हुआ जब पूर्व गृहमंत्री पी. चिदंबरम ने आतंकियों के पाकिस्तान से लिंक पर ही सवाल उठा दिए। जब सारा देश देख रहा था कि वे पाकिस्तानी थे, सबूत हमारे पास थे, तो आपको क्या चाहिए था? क्या आप पाकिस्तान को बचाने की कोशिश कर रहे हैं?

उन्होंने आगे कहा –

आप मुझसे पूछ लेते, मीडिया में देख लेते, या सरकार से जानकारी ले लेते, लेकिन सार्वजनिक मंच पर सवाल उठाकर आप किसके लिए बोल रहे थे?


2005 से 2011 के बीच 27 आतंकी हमलों का ज़िक्र

अमित शाह ने कांग्रेस के शासनकाल के दौरान देश में हुए लगातार आतंकी हमलों की याद दिलाते हुए कहा कि –

2005 से 2011 के बीच भारत में 27 बड़े आतंकी हमले हुए। उस समय क्या किया गया? सिर्फ और सिर्फ डोज़ियर भेजे गए। क्या कभी निर्णायक कार्रवाई हुई? नहीं।

उन्होंने इस दौरान 26/11 मुंबई हमले की भी अप्रत्यक्ष रूप से चर्चा की, और कहा कि “कांग्रेस सरकारें हमेशा शांत रह गईं, लेकिन अब जब सेना कार्रवाई करती है, तो विपक्ष सवाल उठाने लगता है।”


“कांग्रेस ने POTA हटाया, आतंकवाद को बढ़ावा दिया?”

अमित शाह ने अपने संबोधन में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की 2002 की NDA सरकार द्वारा लागू किए गए ‘POTA’ कानून का उल्लेख किया।

उन्होंने आरोप लगाया कि –

कांग्रेस ने सत्ता में आते ही POTA जैसे कड़े आतंक विरोधी कानून को समाप्त कर दिया। किसके लिए? आतंकियों के हित में?

उन्होंने पूछा कि आखिर कांग्रेस को आतंकवाद से लड़ने में क्या आपत्ति थी, और क्यों वह हर बार सख्त कानून का विरोध करती रही।


“PoK आज इसलिए है क्योंकि नेहरू ने युद्ध रोक दिया था”

शाह का सबसे तीखा हमला उस समय हुआ जब उन्होंने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) के मुद्दे को लेकर पंडित जवाहरलाल नेहरू को जिम्मेदार ठहराया।

कल ये पूछ रहे थे कि PoK पर युद्ध क्यों नहीं हुआ… लेकिन युद्ध तो तब रोका गया था, जब हमारे पास जीतने का मौका था। तब नेहरूजी ने युद्ध रोक दिया था।

उन्होंने 1960 के सिंधु जल संधि का जिक्र करते हुए कहा कि –

हमने पाकिस्तान को 80% जल दे दिया। फिर 1971 के शिमला समझौते में भी कांग्रेस PoK का जिक्र तक नहीं कर पाई। अगर तब PoK ले लिया गया होता, तो आज हमें वहां सर्जिकल स्ट्राइक या एयर स्ट्राइक करने की ज़रूरत नहीं पड़ती।


आतंकियों के पास ‘पाकिस्तानी चॉकलेट’ और वोटर लिस्ट – शाह

अमित शाह ने कहा कि ऑपरेशन महादेव के दौरान मारे गए तीनों आतंकियों के पास से जो सामान बरामद हुआ, वो साफ तौर पर उनके पाकिस्तानी नागरिक होने की पुष्टि करता है।

उनके पास पाकिस्तान का वोटर ID था, राइफलें पाकिस्तानी थीं, और यहां तक कि जो चॉकलेट्स उनके बैग में मिलीं, वो भी इस्लामाबाद में बनी थीं।

शाह ने दावा किया कि मारे गए आतंकियों में एक लश्कर-ए-तैयबा का शीर्ष कमांडर सुलेमान भी शामिल था, जो पहलगाम आतंकी हमले का मास्टरमाइंड था।


कांग्रेस का पलटवार – “इतिहास का ज्ञान बिचौलियों से मत लीजिए”

गृह मंत्री के आरोपों पर कांग्रेस ने भी तुरंत प्रतिक्रिया दी। पार्टी प्रवक्ता पवन खेड़ा ने कहा –

गृह मंत्री इतिहास किसी दलाल या बिचौलिए से पढ़कर आए हैं। उनका उद्देश्य सिर्फ नेहरू और कांग्रेस को बदनाम करना है।

कांग्रेस का कहना है कि मोदी सरकार इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश कर रही है ताकि वर्तमान में अपनी विफलताओं से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके।


राजनीतिक विश्लेषण: शाह के निशाने पर सिर्फ विपक्ष नहीं, पूरा नैरेटिव

राजनीतिक जानकार मानते हैं कि अमित शाह का यह भाषण सिर्फ कांग्रेस की आलोचना तक सीमित नहीं था, बल्कि इसका मकसद 2025 के लोकसभा चुनावों के लिए एक बड़ा नैरेटिव गढ़ना था – जिसमें कांग्रेस = कमज़ोर, और BJP = राष्ट्रवाद की प्रतीक दिखाने की रणनीति साफ दिखी।

कांग्रेस पर इतिहास की गलतियों का बोझ डालना, राष्ट्रीय सुरक्षा में असफल बताना, और पाकिस्तान से तुलना – ये सब भाजपा की राजनीतिक स्क्रिप्ट का हिस्सा मानी जा रही है।


संसद में गरमाया माहौल, चुनावी सियासत की झलक

लोकसभा में अमित शाह का बयान संसद के इतिहास में सबसे तीखे और आक्रामक भाषणों में गिना जा रहा है।
कांग्रेस ने जहां पलटवार किया है, वहीं भाजपा ने इसे ‘सच्चाई का आईना’ बताया है।

देश के सबसे बड़े लोकतांत्रिक मंच पर जब इतिहास, सुरक्षा और राजनीति की लड़ाई लड़ी जा रही हो – तब यह साफ हो जाता है कि 2025 का भारत सिर्फ वर्तमान नहीं, बल्कि इतिहास की अदालत में भी चुनाव लड़ेगा।

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