Dreamliner विमान हादसा: उड़ान से पहले ही था मौत का पैग़ाम?
तकनीकी रिपोर्ट, लापरवाही के सबूत और सरकार की जवाबदेही पर तीखा सवाल
नई दिल्ली | 13 जून 2025 | विशेष रिपोर्ट
11 जून 2025 को एयर इंडिया की फ्लाइट AI171 के क्रैश ने पूरे देश को झकझोर दिया। बोइंग 787 Dreamliner (VT-AND) जो अहमदाबाद से लंदन के लिए उड़ान भर रहा था, तकनीकी खराबी के चलते हवा में ही डगमगाया और इमरजेंसी लैंडिंग के प्रयास में बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। हादसे में कई यात्री घायल हुए, जबकि कुछ की हालत गंभीर बताई गई।
इस पूरे घटनाक्रम ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है — क्या सरकार, एयरलाइन और DGCA जैसे नियामक संस्थानों की सामूहिक लापरवाही ने इस हादसे को जन्म दिया?
🧾 विमान की प्रोफाइल: कब बना, कितना चला, क्या हाल था?
| विवरण | आंकड़े |
|---|---|
| ✈️ विमान मॉडल | Boeing 787-8 Dreamliner |
| एयर इंडिया में सेवा शुरू | जनवरी 2014 |
| कुल उम्र | 11.5 साल |
| अधिकतम सेवा अवधि | 25–30 साल या 60,000 फ्लाइट साइकिल (BOEING मानक) |
| फ्लाइट साइकिल पूर्णता | 40,000+ अनुमानित (सटीक आंकड़े गोपनीय) |
| आखिरी मेजर मेंटेनेंस | जानकारी सार्वजनिक नहीं, DGCA भी मौन |
| DGCA अप्रूवल | “फ्लाइंग कंडीशन” पर जारी किया गया था — पर किस आधार पर? |
📸 पहले से था अलर्ट: यात्रियों के वीडियो और सोशल मीडिया पोस्ट
इस विमान से यात्रा करने वाले कई यात्रियों ने पिछले महीनों में अपनी शिकायतें सार्वजनिक की थीं:
- फ्लाइट के भीतर एसी, स्क्रीन, लाइटें, वॉशरूम बार-बार फेल हो रहे थे।
- सीटें टूट चुकी थीं, इमरजेंसी बटन तक काम नहीं कर रहे थे।
- विमान की दीवारों पर कंपन और आवाजें साफ महसूस की गईं।
🗨️ “बोइंग के नाम पर कबाड़ उड़ाया जा रहा है, हर उड़ान मौत के डर के साथ होती है”, — एक यात्री ने मई में X (Twitter) पर लिखा था।
⚙️ क्या है विमान मेंटेनेंस का इंटरनेशनल प्रोटोकॉल?
विमानों के मेंटेनेंस में मुख्यतः चार श्रेणियां होती हैं:
- A Check – हर 400-600 फ्लाइट घंटों में
- B Check – हर 6-8 महीने में
- C Check – हर 18–24 महीने में (पूरा ढांचा जांचा जाता है)
- D Check (Heavy Maintenance Visit) – हर 6-10 साल में (पूरे विमान की खोलकर जांच)
➡️ इस Dreamliner ने 11 साल पूरे कर लिए थे, और इसके दो D-Check होने चाहिए थे — लेकिन इसका रिकॉर्ड सार्वजनिक नहीं किया गया। यह गहरा शक पैदा करता है।
🧑✈️ पायलट यूनियन ने भी जताई थी चिंता
पिछले 2 वर्षों में Air India Pilot Union ने लिखित में शिकायत की थी:
“हम पुरानी एयरक्राफ्ट्स को उड़ाने के लिए मजबूर किए जा रहे हैं जिनकी एयरवर्दिनेस संदिग्ध है। यह न केवल पायलट्स, बल्कि यात्रियों के जीवन के साथ भी खिलवाड़ है।”
पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई।
🏛️ क्या है सरकार की भूमिका?
- एयर इंडिया का निजीकरण होने के बाद मेंटेनेंस में कॉस्ट कटिंग शुरू हुई।
- DGCA की निगरानी प्रणाली में बड़े गैप्स देखे गए हैं।
- फाइलें बंद, रिपोर्टें दबा दी गईं — जैसे कि पुरानी योजनाओं पर सरकारी रवैया।
🗨️ “सरकार पुरानी योजनाओं की फाइलें ‘पेंडिंग’ कहकर बंद कर देती है, तो क्या 11 साल पुराना ये विमान भी इसी नीति का शिकार बना?”
🌐 दूसरे देशों में क्या होता?
| देश | पुराना विमान उड़ाने की नीति |
|---|---|
| 🇺🇸 अमेरिका | FAA हर 5 साल में सख्त D-check कराता है |
| 🇪🇺 यूरोप | EASA नियमों के तहत उड़ान से पहले उपकरण प्रमाणपत्र जरूरी |
| 🇯🇵 जापान | पुराने विमानों पर सीमित उड़ान क्षेत्र लागू |
भारत में ऐसी कोई सार्वजनिक पारदर्शिता नहीं।
📣 जनता और विशेषज्ञ क्या मांग कर रहे हैं?
- इस हादसे की न्यायिक जांच हो, सिर्फ DGCA की नहीं।
- सभी 10 साल से अधिक पुराने विमानों की फ्लाइंग सर्टिफिकेशन रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए।
- एयर इंडिया और DGCA के अधिकारी जो ज़िम्मेदार हैं, उन्हें दंडित किया जाए।
- यात्रियों के लिए एक रेड अलर्ट सिस्टम शुरू हो — जिससे वे जान सकें कि जिस विमान में वे बैठने जा रहे हैं, वह कितनी बार फेल हो चुका है।
🔴 निष्कर्ष: यह हादसा नहीं, चेतावनी है
अगर अब भी नहीं चेते, तो अगली दुर्घटना महज वक्त की बात होगी। तकनीक और तंत्र की लापरवाही अगर राजनीति से ढकी जाएगी, तो हवाई यात्रा कभी सुरक्षित नहीं कही जा सकेगी।
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