जबलपुर में ट्राइबल डिपार्टमेंट के डिप्टी कमिश्नर पर ईओडब्ल्यू की बड़ी कार्रवाई: 5.89 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति का खुलासा
जबलपुर, 22 जुलाई 2025 – मध्यप्रदेश के जबलपुर में पदस्थ जनजातीय कार्य विभाग के डिप्टी कमिश्नर टंघरिक इंद्र लजोड़े के खिलाफ आर्थिक अपराध अन्वेषण ब्यूरो (EOW) ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। छापे की इस कार्रवाई में अब तक 5.89 करोड़ रुपये की अवैध संपत्ति उजागर हो चुकी है। जांच एजेंसी ने तीन अलग-अलग शहरों में स्थित लजोड़े के ठिकानों पर एकसाथ दबिश दी और कई चौंकाने वाले खुलासे किए।
ईओडब्ल्यू को डिप्टी कमिश्नर के खिलाफ कई शिकायतें मिल रही थीं कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए बेहिसाब संपत्ति जमा की है। प्राथमिक जांच के बाद तीन टीमों का गठन किया गया, जिन्होंने जबलपुर स्थित उनके शासकीय आवास, भोपाल के बरेला क्षेत्र में निजी निवास और सागर स्थित पुश्तैनी संपत्ति पर एकसाथ छापा मारा। कार्रवाई के दौरान नकदी, ज़मीन-जायदाद, महंगे इलेक्ट्रॉनिक आइटम, वाहन, बैंक लॉकर, बीमा निवेश और शराब की बोतलों सहित कई संदिग्ध सामग्रियां बरामद हुईं।
जांच में सामने आया है कि लजोड़े ने न केवल खुद के नाम पर, बल्कि अपनी मां और भाई के नाम पर भी संपत्तियां खरीद रखी थीं, ताकि जांच एजेंसियों की नजर से बचा जा सके। जबलपुर स्थित सरकारी आवास से 7 लाख से अधिक की नकदी, करीब 20 लाख के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, 17 प्लॉट्स के दस्तावेज और शराब की 56 बोतलें बरामद की गईं। वहीं भोपाल में उनके घर से करीब 15 लाख के गहने, 23 लाख के इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, तीन वाहन, एक फ्लैट और बीमा निवेश से जुड़े कागजात मिले हैं।
सागर के पते से भी अहम दस्तावेज और ज़मीन के रिकॉर्ड मिले हैं, जिनमें एक 3300 वर्गफुट का प्लॉट और अन्य चल-अचल संपत्तियां शामिल हैं। कुल मिलाकर अब तक की जांच में उजागर संपत्ति का आंकड़ा ₹5.89 करोड़ तक पहुंच चुका है, जो डिप्टी कमिश्नर की आय से कई गुना अधिक है।
ईओडब्ल्यू ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धाराओं 13(1)(b) और 13(2) के तहत मामला दर्ज किया है। अफसर के खिलाफ कार्रवाई अभी जारी है और एजेंसी को उम्मीद है कि जांच आगे बढ़ने पर और भी संपत्ति का खुलासा हो सकता है। एजेंसी इस बात की भी तफ्तीश कर रही है कि संपत्तियां किन वर्षों में खरीदी गईं और इनमें किन-किन रिश्तेदारों या बाहरी लोगों की भूमिका रही।
यह मामला ना केवल एक अधिकारी के भ्रष्टाचार की परतें खोलता है, बल्कि यह भी दिखाता है कि किस तरह पद की आड़ में पूरे परिवार को इस गोरखधंधे में शामिल किया गया। ईओडब्ल्यू की इस कार्रवाई ने एक बार फिर यह साबित किया है कि भ्रष्टाचार चाहे कितना भी गहराई में क्यों न समाया हो, वह अब कानून की पकड़ से बच नहीं सकता।
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