“चढ़ा दो गाड़ी, दो-चार मर भी जाएं तो सही”: जबलपुर में खनन माफिया का खूनी दुस्साहस; अधिकारियों को कुचलने का दिया खुला आदेशसब-
वर्दी और कानून की कीमत कुछ भी नहीं? नागपुर हाईवे पर ‘रक्तरंजित’ होने से बची प्रशासनिक कार्रवाई, माफिया सरगना गिरफ्तार
जबलपुर: क्या इंसान की जान की कीमत अब चंद डंपर रेत और गिट्टी से भी कम हो गई है? क्या वर्दी और कानून का इकबाल माफिया के टायरों के नीचे कुचला जा सकता है? यह सवाल शुक्रवार की शाम जबलपुर-नागपुर हाईवे पर तब खड़ा हो गया, जब एक खनन माफिया ने खुलेआम अपने ड्राइवरों को आदेश दिया— “गाड़ी चढ़ा दो, दो-चार ना सही।”यह सिर्फ एक धमकी नहीं थी, बल्कि यह उस मानसिकता का परिचय था जो मुनाफे के लिए खून बहाने से भी नहीं हिचकती।
मानेगांव में ‘गुंडाराज’ का नंगा नाचघटना बरगी थाना क्षेत्र के मानेगांव की है। प्रशासन की एक संयुक्त टीम, जिसमें तहसीलदार, प्रशिक्षु IPS (DSP) और खनिज विभाग के अधिकारी शामिल थे, अपनी ड्यूटी निभा रहे थे। उन्होंने एम-सेंड और गिट्टी से भरे तीन ओवरलोडेड हाइवा (डंपर) जब्त किए। कानून अपना काम कर रहा था, तभी वहां काले रंग की लग्जरी कार से माफिया सरगना रोहित जैन अपने साथियों के साथ आ धमका।
वह पल, जब सांसे अटक गईंरोहित जैन ने न केवल सरकारी काम में बाधा डाली, बल्कि अपनी कार जब्त किए गए हाइवा के आगे अड़ा दी। जब अधिकारियों ने उसे नियम और कलेक्टर न्यायालय की प्रक्रिया समझाई, तो उसका सब्र जवाब दे गया। उसने चिल्लाते हुए अपने ड्राइवरों को जो कहा, उसने वहां मौजूद हर शख्स को सन्न कर दिया। उसने कहा— “गाड़ी चढ़ा दो इनके ऊपर, दो-चार ना सही।”सोचिए, उन अधिकारियों के परिवारों पर क्या गुजरती अगर यह आदेश मान लिया जाता? चंद रुपयों की रॉयल्टी बचाने के लिए यह माफिया ‘दो-चार’ लाशें गिराने को तैयार था।
कानून का पलटवारहालात बेकाबू होते देख और माफिया की हिंसक मंशा को भांपते हुए अधिकारियों ने तत्काल बरगी थाने से पुलिस बल बुलाया। राहत की बात यह रही कि पुलिस के पहुंचने पर आरोपी की हेकड़ी निकल गई। मौके पर ही रोहित जैन को गिरफ्तार कर लिया गया और तीनों हाइवा जब्त कर लिए गए।बरगी थाने में खनिज इंस्पेक्टर की शिकायत पर गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। यह घटना जबलपुर प्रशासन के लिए एक चेतावनी है और समाज के लिए एक चिंता का विषय।
‘द तथ्य’ का सवाल:आखिर माफियाओं में इतना हौसला आता कहाँ से है कि वे ट्रेनी IPS और तहसीलदार जैसे अधिकारियों को भी ‘कीड़े-मकोड़े’ समझकर कुचलने की बात करते हैं? क्या कानून का शिकंजा इन पर ढीला है?
जुड़े रहें ‘द तथ्य न्यूज़’ के साथ।— पत्रकार हिमांशु
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