जबलपुर के बीचों-बीच मॉल परिसर में चल रही अवैध डेयरी का भंडाफोड़, नगर निगम को नहीं थी भनक — ‘द तथ्य न्यूज़’ की टीम ने किया खुलासा
रिपोर्टर: हिमांशु | द तथ्य न्यूज़ | दिनांक: 5 अगस्त 2025
जबलपुर — शहर की सबसे व्यस्त लोकेशन राइट टाउन में, जहां कभी ज्योति टॉकीज थी, अब ‘के.ए. मॉल’ बना है। आधुनिकता और चमक-धमक से भरपूर इस मॉल की दीवारों के भीतर एक ऐसा सच छिपा था, जो ना सिर्फ नगर निगम की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करता है बल्कि आम जनता के स्वास्थ्य और कानून व्यवस्था पर भी सीधा हमला करता है।
द तथ्य न्यूज़’ की टीम जब निजी कार्य से मॉल परिसर में पहुँची, तो टू-व्हीलर पार्किंग में बंधी गाय-भैंसों को देखकर चौंक गई। जांच करने पर पता चला कि वहां पर एक अवैध डेयरी संचालित की जा रही है, जिसकी मालिकी मॉल की नहीं, बल्कि एक स्थानीय व्यक्ति शंकर यादव के पास है।
डेयरी, मॉल की नहीं… मगर मॉल परिसर में
यह डेयरी के.ए. मॉल के परिसर में मौजूद पार्किंग एरिया में चलाई जा रही है। इससे साफ होता है कि मॉल प्रबंधन या तो इस अवैध गतिविधि से अनजान बना रहा या फिर उसने इसे नजरअंदाज किया।
डेयरी में दूध निकालने, भैंसों को बांधने, गोबर फेंकने जैसी सारी गतिविधियां खुलेआम चल रही थीं। साफ-सफाई की कोई व्यवस्था नहीं थी। वहां पर मौजूद गंदगी, बदबू और कीचड़ इस बात का प्रमाण थी कि यह कई दिनों से संचालित हो रही थी।
नगर निगम के कानून क्या कहते हैं?
नगर निगम अधिनियम और नगर स्वास्थ्य नियमों के मुताबिक, शहर के किसी भी घनी आबादी वाले, व्यावसायिक या सार्वजनिक स्थान पर पशुपालन या डेयरी संचालन सख्त रूप से प्रतिबंधित है।
ये हैं कानून के मुख्य बिंदु:
- शहरी सीमा के भीतर कोई भी व्यक्ति खुले स्थान, मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स, गली, नाली या सार्वजनिक स्थल पर पशु नहीं बांध सकता।
- नगर निगम की अनुमति के बिना डेयरी चलाना अवैध है।
- मॉल या बाजार जैसी जगहों पर पशु रखने से स्वास्थ्य और सुरक्षा को खतरा होता है, इसलिए यह पूरी तरह निषिद्ध है।
- नगर निगम को यदि ऐसा कोई मामला पता चलता है, तो उसे तत्काल कार्रवाई करनी होती है — पशु हटाना, चालान काटना, जुर्माना लगाना और ज़रूरत पड़ी तो सीलिंग तक।
- मप्र नगरपालिका अधिनियम की धारा 133 के अंतर्गत गंदगी फैलाने या सार्वजनिक स्थान पर पशुपालन करने पर कड़ी कार्रवाई हो सकती है।
कमिश्नर का जवाब — “हमें कोई जानकारी नहीं थी”
इस पूरे मामले की जानकारी जब ‘द तथ्य न्यूज़’ की टीम ने नगर निगम कमिश्नर प्रीति यादव को दी, तो उन्होंने बताया:> “के.ए. मॉल परिसर में कोई डेयरी चल रही है, इसकी जानकारी हमें नहीं थी। जैसे ही हमें सूचना मिली, हमने तत्काल अपनी टीम मौके पर भेजी है। यदि वहां अवैध पशुपालन पाया गया तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।”
कानून सिर्फ किताबों तक सीमित?
सवाल यही है कि जब मॉल जैसी जगहों में पशुपालन चल रहा है और नगर निगम को जानकारी तक नहीं है, तो बाकी शहर में किस तरह की निगरानी हो रही है? क्या नगर निगम की निरीक्षण प्रणाली इतनी कमजोर है?
क्या मॉल प्रबंधन ने इस डेयरी को जानबूझकर अनदेखा किया?
क्या शंकर यादव को किसी तरह की स्थानीय संरक्षण प्राप्त है?
सार्वजनिक स्वास्थ्य पर खतरा
गाय-भैंस जैसे जानवरों का खुले में गोबर करना, उनका मल-मूत्र बहना और बग़ैर सफाई के डेयरी संचालन करना कई बीमारियों का स्रोत बनता है — जैसे डेंगू, मलेरिया, फूड पॉइजनिंग, और त्वचा रोग।
मॉल जैसे स्थान जहां हजारों लोग रोजाना आते-जाते हैं, वहां इस तरह की गतिविधि न सिर्फ स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ है, बल्कि स्मार्ट सिटी के सपनों की धज्जियाँ उड़ाने वाला मामला भी है।
अब आगे क्या?
नगर निगम की टीम अब मामले की जांच में लगी है। ‘द तथ्य न्यूज़’ लगातार इस मुद्दे पर नज़र बनाए हुए है। यदि कार्रवाई नहीं होती या आधी-अधूरी होती है, तो यह साफ संकेत होगा कि शहर में अवैध गतिविधियां संरक्षण में पल रही हैं।
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